HARIDWARUTTARAKHAND

कर्मचारी संघ अपनी मांगों को लेकर आंदोलन की राह पर

हरिद्वार

चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी संघ चिकित्सा स्वास्थ्य सेवाएं उत्तराखंड ने आज दो टूक अधिकारियों को जबाब दिया हैं कि यदि लम्बे समय से लम्बित मांगों का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा। जिसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी की होगी। प्रदेश अध्यक्ष दिनेश लखेडा ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार को पत्र लिखकर कर्मचारियों की बहुत समय से लंबित 09 सूत्रीय मांगों के संबंध में जल्द निस्तारण करने का अनुरोध किया है। कर्मचारियों की वेतन विसंगति होने पर कर्मचारियों के कम या ज्यादा वेतन लेने पर अगर रिकवरी होती है तो उसका जिम्मेदार कर्मचारी और अधिकारी कौन होगा? इसके संबंध में कार्यवाही की जाए। चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के मृतक आश्रितों की नियुक्ति, उनके देयक दिये जाने, सेवनिर्वत्ति कर्मचारियों की पेंशन और देयक दिये जाने का कार्य अभी तक नहीं हो रहा है। कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों का भुगतान 2021 से लंबित है, लेकिन आज तक भुगतान नही हुआ है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की वर्दी का शासनादेश के अनुसार उनकी वर्दी का भुगतान उनके वेतन में लगाकर किया जाएगा एवं यात्र भत्ता बिलो के भुगतान में बजट न होने का कारण बताया जाता है, जोकि लाना कार्यलय का काम है। चतुर्थ श्रेणी कर्मियों द्वारा कावड़ मेले में डयूटी की है जिसमे ट्टषिकुल और गुरुकुल आयुर्वेदिक चिकित्सालय के कर्मचारियों ने भी कार्य किया है उनका यात्र भत्ता बिल का भुगतान किया जाये। चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की शासनादेश अनुसार प्रदेश में मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा वाहन चालक पर पदोन्नति कर दी गई है, लेकिन हरिद्वार में नही हुई है। जबकि यहां वाहन चालक के पद रिक्त पड़े हैं। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के आवासों में रंगाई पुताई, मरम्मत, एवं सीवर लाइन डालने की कार्यवाही करने की एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के योग्य आश्रितों को वरीयता के आधार पर नियुक्ति और जो कर्मचारी कोविड सेवा के दौरान निकाले गए हैं उनको पुनः सेवा में रखा जाए। इन मांगों को लेकर जल्द ही कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। जिलाध्यक्ष शिवनारायण सिंह, जिला मंत्री राकेश भँवर उपशाखा ट्टषिकुल अध्यक्ष छत्रपाल सिंह एवं गुरुकुल अध्यक्ष राकेश चंद्र ने कहा कि प्रदेश स्तर से कर्मचारियों की 09 सूत्रीय मांगों के लिए जो भी दिशा निर्देश मिले हैं उन पर तत्काल पत्र बना दिया गया है। जिसमें आचार संहिता को ध्यान में रखते हुए एक माह का समय दिया गया है अन्यथा कि स्थिति में बिना कोई नोटिस दिए बिना कर्मचारी धरने प्रर्दशन को बाध्य होंगे। जिसका सम्पूर्ण उत्तरदायित्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिद्वार का होगा।