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गीता के पाठमात्र से मनुष्य को मिलती है मुक्ति: प्राचार्य

हरिद्वार

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के निर्देशानुसार श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में गीता जयन्ती के उपलक्ष्य में साप्ताहिक गीता पाठ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें महाविद्यालय के विद्यार्थियों सहित समस्त प्राध्यापकगण भी भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम के पांचवें दिन को संबोधित करते हुए प्रभारी प्राचार्य डॉ. वृजेंद्र कुमार सिंह देव ने कहा कि गीता एक ऐसा शास्त्र है जिसके पाठमात्र से ही मनुष्य मुक्ति प्राप्त कर सकता है। गीता काम, क्रोध, लोभ, मोह, मात्सर्य को दूर करने के लिए मार्ग प्रदान करती है। कई सम्प्रदायों के धर्मग्रन्थों के होते हुए भी गीता को विशिष्ट स्थान प्राप्त है। साहित्य विभागाध्यक्ष डॉ. निरंजन मिश्र ने कहा कि वर्तमान में प्रत्येक युवा को गीता का ज्ञान दिया जाना चाहिए, क्योंकि गीता में सही रूप से जीवन जीने की कला बताई गई है एवं कर्तव्य बुद्धि से कर्म करने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि कर्म का फल ईश्वर को अर्पित कर देने से उससे होने वाले पाप के भागी हम नहीं होते हैं। इस मौके पर व्याकरण विभागाध्यक्ष डॉ. रवीन्द्र कुमार आर्य, विवेक शुक्ला, जगदीश पोखरिया, अंकित आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. दीपक कोठारी ने किया।