फसल बीमा योजना के लिए ड्रोन के इस्तेमाल को मंजूरी
नई दिल्ली —
मौसम की वजह से खराब होने वाली फसलों के सर्वे के लिए कृषि विभाग ड्रोन का इस्तेमाल करेगा। इससे प्रधानमंत्री कृषि बीमा योजना के तहत वक्त से भुगतान करने में मदद मिलेगी। डायरेक्टोरेट जरनल ऑफ सिविल एविएशन ने इसके लिए विभाग के प्रपोजल को मंजूरी दे दी है। इस स्कीम में गेहूं और चावल उगाने वाले 100 जिले शामिल किए गए हैं। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह देश में अब तक की पहली और सबसे बड़ी रिमोट सेंसिंग तकनीक पर आधारित पायलट स्टडी है, जो फसल की उपज के आकलन के लिए की जाएगी। इस स्टडी में ड्रोन से तस्वीरें लेने के अलावा, हाई रिजोल्यूशन सैटेलाइट डेटा, बायोफिजिकल मॉडल, स्मार्ट सैंपलिंग, क्रॉप स्नैप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
13 इंटरनेशनल और नेशनल एजेंसियां शामिल
कृषि विभाग ने 2019 में खरीफ और 2019-20 में रबी की फसल के लिए ग्राम पंचायत लेवल पर फसलों की स्थिति जानने के लिए पायलट स्टडी की शुरुआत की थी। इसमें 13 इंटरनेशनल और नेशनल एजेंसियों को शामिल किया गया था। इन एजेंसियों ने खरीफ की 9 फसलों के लिए 15 राज्यों के 64 जिलों में सैटेलाइट, बायोफिजिकल मॉडल, स्मार्ट सैंपलिंग के जरिए स्टडी की थी। उन्होंने कहा कि फसलों की पैदावार के नतीजों की पुष्टि के लिए चावल और गेहूं उगाने वाले जिलों में 2019-20 में पायलट स्टडी जारी रखी गई थी।

