UTTARAKHAND

भोजनमाता ने दस हजार मानदेय मांगा

रुड़की।  राजकीय व अशासकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक स्कूलों, मदरसों में मिड डे मील योजना के तहत खाना पकाने वाली भोजनमाताओं को अब प्रतिमाह दो हजार के बजाय तीन हजार रुपये मानदेय मिलेगा। भोजनमाताओं ने दस हजार रुपये मानदेय की मांग की है। सभी राजकीय, अशासकीय, प्राइमरी तथा जूनियर हाईस्कूलों के अलावा मदरसों और विशेष शिक्षण केंद्रों में पंजीकृत बच्चों को दोपहर के समय पका पकाया खाना देने के लिए सरकार मिड डे मील योजना संचालित कर रही है। इस खाने को पकाने के लिए स्कूलों में भोजनमाताएं रखी गई हैं। भोजनमाताओं को फिलहाल दो हजार रुपये प्रतिमाह का मानदेय दिया जा रहा है। उनके मानदेय के मद में 900 रुपये केंद्र सरकार व 1100 रुपये राज्य सरकार देती है। लंबे समय से भोजनमाताएं मानदेय में बढ़ोतरी की मांग करती आ रही हैं। उनका तर्क है कि स्कूलों में खाना पकाने व उसे खिलाने में उनका भी पूरा दिन लग रहा है। इस लिहाज से महीने का महज दो हजार रुपया मानदेय बहुत कम है। अब राज्य सरकार राज्यांश के तौर पर 1100 रुपये की जगह भोजनमाताओं को 2100 रुपये प्रतिमाह देगी। लिहाजा अब उन्हें हर महीने तीन हजार रुपये मिलेंगे। राज्य सरकार की तरफ से सचिव वीवीआरसी पुरुषोत्तम ने इस बाबत शासनादेश जारी कर दिया है। उधर, भोजनमाता मुनेश, कविता, जहीरा, रानी, सोमवती का कहना है कि उनके काम के लिहाज से तीन हजार रुपये महीने का मानदेय भी काफी कम है। उनके मुताबिक सरकार को उनका मानदेय बढ़ाकर कम से कम दस हजार रुपये प्रतिमाह करना चाहिए था।