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थानों से नहीं मिल रहा न्याय, फरियादी कोर्ट जाने को मजबूर

देहरादून

एक तरफ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार लगातार महकमे की ढीली व्यवस्था के पेच कसने में लगे हुए हैं और दूसरी तरफ कुछ पुलिसकर्मी उनकी इस कोशिश पर पलीता लगाने में। उदाहरण के लिए हर फरियादी की शिकायत दर्ज करने के डीजीपी के आदेश के बावजूद दून शहर के कुछ कोतवालीध्थानों में फरियादियों को टरकाने की व्यवस्था पूर्ववत चल रही है। हाल यह है कि थाने से न्याय मिलने की आस टूटने पर पीडित न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को मजबूर हो रहे हैं।
इस वर्ष बीते दो माह में ही 18 ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें पुलिस ने मुकदमा तब दर्ज किया, जब कोर्ट की तरफ से आदेशित किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून डॉ. योगेंद्र सिंह रावत का कहना है कि जमीन के विवाद के मामलों में जांच करनी पड़ती है। ऐसे में कई बार फरियादी कोर्ट में शिकायत पत्र दे देते हैं। कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज होने के मामलों में बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन अब सभी थानाध्यक्षों को निर्देशित किया गया है कि तत्काल प्राथमिकी दर्ज करें।
देहरादून शहर में कुल 11 कोतवाली थाने हैं। हैरत की बात यह है इन कोतवालीध्थानों में 2020 में पूरे वर्ष में कुल 23 मुकदमे कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुए। वहीं, इस वर्ष दो माह में ही दून इस आंकड़े के करीब पहुंच गया है। यह स्थिति चिंताजनक होने के साथ ही बताती है कि पुलिस के कार्य करने की प्रवृत्ति में अभी भी काफी सुधार लाने की जरूरत है।