नाग पंचमी पर किया पूजन
रुड़की।
नाग पंचमी पर मंदिरों में पूजा-अर्चना की गई। श्रावण शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी मनाई जाती है। आईआईटी स्थित सरस्वती मंदिर के पुजारी आचार्य राकेश शुक्ल ने बताया कि पंचमी तिथि नागों की होती है। लेकिन श्रावण शुक्ल पंचमी नागों के लिए बहुत खास होती है। इसके पीछे कई पौराणिक मान्यताएं हैं। श्रीमद् भागवत कथा के अनुसार जिस समय राजा परीक्षित को तक्षक नाग ने डस लिया था और उनकी मृत्यु हो गई। उसी समय परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने नाग जाति से बदला लेने के लिए नाग यज्ञ का अनुष्ठान किया। उसमें सभी नाग यज्ञ की अग्नि में जलने लगे। अपने वंश का विनाश देखते हुए तक्षक नाग महात्मा जरत्कारु के पुत्र ऋषि आस्तिक के शरण में गया और उनसे नाग यज्ञ रोकने का निवेदन किया। तब ऋषि आस्तिक ने ब्रह्मा के सहयोग से नाग यज्ञ को बंद करवाया और ब्रह्मा ने नागों को वरदान दिया कि आज के दिन जो कोई भी नागों की पूजा करेगा उसे कभी भी सर्प का भय नहीं रहेगा। जिस तिथि को ब्रह्मा जी ने नागों को अभय वरदान दिया था वह श्रावण शुक्ल की पंचमी तिथि थी। इसलिए यह तिथि नागों को विशेष प्रिय हुई। लोगों ने नाग पंचमी पूजन के साथ भगवान शिव की पूजा रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जप, गायत्री मंत्र का जप आदि किया।

