HARIDWARUTTARAKHAND

त्याग तपस्या सामाजिकता की प्रतिमूर्ति थे मं. विजयानंदः राजराजेश्वराश्रम

हरिद्वार

उत्तरी हरिद्वार की प्रख्यात धार्मिक संस्था बाबा हरिहर धाम भागीरथी नगर भूपतवाला में आयोजित ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज की पुण्यतिथि पर तीर्थनगरी के अखाड़ों, महामंडलेश्वरो संतो महंतो ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज त्याग तपस्या व सामाजिकता की प्रतिमूर्ति थे उन्होंने जीवन पर्यन्त सनातन धर्म व संस्कृति को बढ़ाने का कार्य किया। उक्त उदगार शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज की पुण्यतिथि पर आयोजित श्र)ांजलि सभा में कहे। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज एक समाजसेवी संत थे उन्होंने जीवन पर्यन्त सामाजिकता को महत्व दिया और उनके अंदर सेवा समर्पण निष्ठा भाव का अटूट संगम था उसी से वे संत समाज के साथ साथ सर्व समाज के प्रिय संत बन गए। जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष महंत प्रेम गिरि महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज ने तीर्थ नगरी के संतो को एकसूत्र में पिरोने का काम किया उन्होंने जीवन भर संत समाज के साथ साथ सर्व समाज को जोड़ने का काम किया वे सभी संतों महंतों अखाड़ों के प्रिय थे, उसी का परिणाम है कि ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज की पुण्यतिथि पर तीर्थनगरी के संतो महंतो अखाड़ों और महामंडलेश्वरो ने अपनी भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित कर पुण्य आत्मा की शांति हेतु भगवान से प्रार्थना की। ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज की पुण्यतिथि कार्यक्रम के आयोजक जूना अखाड़ा के सचिव वरिष्ठ महंत देवानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज ने जीवन पर्यन्त मित्र धर्म निभाया और संतो के बीच मित्रता का रस भाव भरा उन्होंने जीवन भर श्री कृष्ण और अर्जुन की मित्रता को महत्व दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती जैसे संतो महंतो की कर्तव्य परायणता सहजता सरलता और सामाजिकता से सनातन धर्म का संरक्षण संवर्धन हो रहा है। पुण्यतिथि कार्यक्रम के संयोजक महंत कमलदास महाराज ने पुण्यतिथि श्रद्धांजलि समारोह में पधारे अखाड़ों, महामंडलेश्वर व संतों महंतो का माल्यार्पण कर स्वागत किया। ब्रह्मलीन महंत विजयानंद भारती महाराज को महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज, बड़ा अखाड़ा उदासीन के कोठारी महंत दामोदर दास महाराज, महामंडलेश्वर नवलकिशोर दास महामंडलेश्वर कथा व्यास डॉ. मुक्तानंद महाराज ,म.म. डॉ. प्रेमानंद, महंत दर्शनदास महाराज, म.म रूपेंद्रप्रकाश, म.म. चिंदविलासानंद सरस्वती, महंत देवानंद सरस्वती, महंत ज्ञानदास महाराज, महंत विष्णुदास आदि मौजूद रहे।