कुत्तों के काटने की संख्या पर नगर निगम पर उठे सवाल
हरिद्वार
जिला अस्पताल में दो दिनों से कुत्ते के काटने वाले मरीजों की संख्या में अचानक इजाफा हो जाने से चिकित्सक हैरान है। इस घटना ने नगर निगम की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिये है। बताया जा रहा हैं कि मरीजों में बच्चों, बुजुर्ग व युवा शामिल हैं। जिनको लावारिस कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है। दो दिनों में अब तक अस्पताल में 73 मरीज उपचार के लिए पहुंच चुके हैं। जिनमें करीब आधा दर्जन मरीज ऐसे भी रहे जिनको कुत्तों बुरी तरह जख्मी कर दिया। शहर में भारी संख्या में कुत्ते से काटने की घटना का नगर निगम ने अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया है। जबकि नगर निगम में छोटी छोटी बातों को लेकर पक्ष व विपक्ष के पार्षद एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने से पीछे नहीं रहते, लेकिन कुत्ते की काटने की घटना पार्षदों को दिखाई नहीं दे रही, जोकि बड़ी अचरज की बात है। शहर में भारी संख्या में कुत्ते की घटना को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और नगर निगम की राजनीति करने वाले पार्षद मौन हैं। बताते चले कि शुक्रवार की सुबह से ही जिला अस्पताल में अचानक एक के बाद एक दोपहर तक कुत्ते से काटने के 37 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। इतनी संख्या में कुत्ते के काटने के मरीज पहुंचने को देखते हुए चिकित्सक भी हैरान रह गए। जिनमें छः मरीज ऐसे भी थे जिनको कुत्ते ने बुरी तरह जख्मी कर डाला। कुत्ते के काटने के मरीजों के जिला अस्पताल में पहुंचने का क्रम यहीं नहीं रूका, बल्कि शनिवार को भी बदस्तूर जा रही रहा। शनिवार को भी सुबह से दोपहर तक कुत्ते के काटने के 36 मरीज उपचार के लिए पहुंचे। दो दिनों में जिला अस्पताल में 73 मरीज के कुत्ते के काटने के पहुंचना कोई छोटा आकंड़ा नहीं है, बल्कि बहुत बड़ा आंकड़ा है। लेकिन उसके बावजूद नगर निगम कोई गम्भीरता नहीं दिखा रहा है। वहीं नगर निगम में पक्ष व विपक्ष के पार्षद छोटी छोटी बातों को लेकर एक दूसरे पर हमलावर रहते हुए मीडिया में अपनी जनता के प्रति जवाबदेही का ठिठोरा पीटते हुए उनका सच्चा हमदर्द साबित करने के लिए बयान जारी करते रहते है। लेकिन शहर में इतनी बड़ी संख्या में लावारिस कुत्तों के काटने की घटना हो जाने के बाद भी नगर निगम के पक्ष व विपक्ष के पार्षद मौन है, लगता है कि यह मुद्दा उनके काम का नहीं है। जबकि शहर के भीतर सार्वजनिक जगह पर लावारिस पशुओं व कुत्तों की व्यवस्था की जिम्मेदारी नगर निगम पर होती है। लेकिन यहां पर सभी मौन हैं, इस मुद्दे पर पक्ष व विपक्ष का कोई लाभ होता नजर नहीं आ रहा है। जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. शशीकांत ने बताया कि इतनी बड़ी संख्या में कुत्ते के काटने के मरीज पहुंचना अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अस्पताल में शुक्रवार को 37 कुत्ते के काटने के मरीज पहुंचे। जिनमें छ मरीज काफी जख्मी थे, जोकि निर्मला छावनी से उपचार के लिए पहुंचे थे। वहीं यह आकंडा यही नहीं रूका शनिवार को भी बदस्तूर जारी रहा। शनिवार को भी कुत्ते के काटने के 36 करीज उपचार के लिए पहुंचे। जिला अस्पताल में दो दिनों मे कुत्ते के काटने के 73 मरीज पहुंचना कही ना कही नगर निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोल रहा है।

