खेल हमें जोड़ने का काम करते हैं: चंद्रेश कुमार
हरिद्वार
संस्कृत शिक्षा सचिव चंद्रेश कुमार ने कहा कि खेल हमें जोड़ने का काम करते हैं, खिलाड़ियों को असफलता मिलने पर कभी निराश नहीं होना चाहिए। खेलों से युवाओं में आगे बढ़ने की भावना विकसित होती है, इसलिए खेल प्रतियोगिताएं छात्र-छात्राओं के जीवन का अभिन्न हिस्सा बननी चाहिए। उत्तराखंड संस्कृत विवि में आयोजित तीन दिवसीय अंतरमहाविद्यालय क्रीड़ा प्रतियोगिता के समापन अवसर पर मुख्य अतिथि चंद्रेश कुमार ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालय में छात्राओं के लिए भी छात्रावास की सुविधाएं मिले इस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं। कहा कि खेलों के विकास में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। विशिष्ट अतिथि पतंजलि भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के संयोजक डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि भारतीय खेलों का पूरे विश्व में डंका बजता है, खेल हमें अवसाद और बीमारियों से दूर रखते हैं। भारतीय शिक्षा बोर्ड से संस्कृत जुड़ने वाली है। जिससे संस्कृत के छात्रों के लिए रोजगार के दरवाजे शीघ्र ही खुलेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. दिनेशचंद्र शास्त्री ने कहा कि हमें जीवन को प्रतियोगिता की तरह स्वीकार करना चाहिए, खिलाड़ी छात्रों के जीवन में हमेशा प्रतियोगिता की भावना बनी रहे यह महत्वपूर्ण है, जीवन में आगे बढ़ने का मूल मंत्र भी प्रतिस्पर्धा ही है। क्रीड़ा प्रभारी डॉ. लक्ष्मी नारायण जोशी, खेल अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर शर्मा ने विजेता खिलाड़ियों ने नामों की घोषणा की। संस्कृत शिक्षा सचिव चंद्रेश कुमार, कुलपति प्रो. शास्त्री, कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी तथा वित्त नियंत्रक लखेन्द्र गोन्थियाल ने संयुक्त रूप से विजेता खिलाड़ियों को मेडल तथा ट्राफी देकर सम्मानित किया। कुलसचिव गिरीश कुमार अवस्थी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। संचालन डॉ. सुमन भट्ट ने किया। निर्णायक मंडल में डॉ. अंकित शर्मा, डॉ. जय कुमार, एथलेटिक्स फेडरेशन के सचिव भारत भूषण, संजय कुमार, अंजना उनियाल, राजेन्द्र नौटियाल तथा नीशू कुमार को मुख्य अतिथि ने सम्मानित किया। इस अवसर पर उपकुलसचिव दिनेश राणा, संस्कृत शिक्षा निदेशक डॉ. शिव कुमार खाली, सहायक निदेशक पद्माकर मिश्र, डॉ वाजश्रवा, मनोज गहतोडी और विवि के शिक्षक, कर्मचारी और छात्र मौजूद रहे।

