बंधनों से मुक्ति का मार्ग सुझाता है गायत्री महामंत्र: डॉ. पण्ड्या
हरिद्वार
नवरात्र साधना के चौथे दिन देव संस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने साधकों को गायत्री महामंत्र के अर्थ व वैज्ञानिक पक्ष पर जानकारी दी। प्रतिकुलपति ने कहा कि गायत्री के गायन, जप करने से वेदांत के ज्ञान को भी प्राप्त कर लेते हैं। गायत्री अनुष्ठान साधक को अवसाद से बचाता है और यह चित्त और इंद्रियों की क्रियाओं को वश करते हुए मन को एकाग्र करने में सहायक है। वेदांत का ज्ञान अर्थात जीवन को उन्मुख करने वाला सद्ज्ञान है। शांतिकुंज में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि गायत्री महामंत्र का अनुष्ठान मोह-माया के बंधन से मुक्त करता है। गायत्री वेद के जननी है, लोगों को पावन करने वाली, अज्ञान को हरने वाली, चित्त को शुद्ध करने वाली, प्राणों की रक्षा करने वाली है। उन्होंने कहा कि आज व्यक्ति अनचाहे बंधनों में बंध गया है। इन बंधनों को मुक्त करने में वेदमाता गायत्री की साधना से संभव है।
