उपराष्ट्रपति धनखड़ ने खरगे को फिर लिखा पत्र, क्रिसमस के दिन अपने आवास पर आमंत्रित किया
व्यवधान और विपक्षी सांसदों के निलंबन के मुद्दे पर बातचीत के लिए 25 दिसंबर को अपने आवास पर आमंत्रित किया और कहा कि उनके बार-बार आग्रह के बावजूद शीतकालीन सत्र के दौरान ऐसी बैठक नहीं हो सकी। उपराष्ट्रपति ने कहा कि सदन में व्यवधान इरादातन था और रणनीति के तहत था। धनखड़ ने पत्र में कहा, ‘‘इस प्रकरण में मुख्य विपक्षी दल की पूर्वनियोजित भूमिका की ओर इंगित करके, मैं आपको लज्जित नहीं करना चाहता, लेकिन जब कभी भी मुझे आपसे बातचीत करने का अवसर लाभ मिलेगा, मैं आपसे वह साझा अवश्य करूंगा।’’ राज्यसभा में विपक्ष के नेता खरगे को एक ताजा पत्र में धनखड़ ने लिखा, ‘‘हमें आगे बढ़ने की जरूरत है’’ और उन्हें 25 दिसंबर को ‘‘या उनकी सुविधानुसार किसी भी समय पर’’ अपने आधिकारिक आवास पर बातचीत के लिए आमंत्रित किया।
थोड़ी थोड़ी देर के लिए सदन को स्थगित कर, मैंने अपने कक्ष में बुला कर बातचीत करने का भी भरसक प्रयास किया।’’ कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने शुक्रवार को धनखड़ को पत्र लिखकर कहा था कि इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का निलंबन भारत के संसदीय लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के लिए हानिकारक है। खरगे ने धनखड़ को लिखे पत्र में कहा कि वह इतने अधिक सांसदों के निलंबन से दुखी एवं व्यथित हैं और हताश एवं निराश महसूस कर रहे हैं। इससे पहले उपराष्ट्रपति धनखड़ ने खरगे को लिखे एक पत्र में कहा था कि आसन से स्वीकार न की जा सकने वाली मांग करके सदन को पंगु बना देना दुर्भाग्यपूर्ण और जनहित के खिलाफ है। संसद के शीतकालीन सत्र के निर्धारित समापन से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को राज्यसभा अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई। शीतकालीन सत्र के दौरान अनुचित व्यवहार और कदाचार के कारण 46 सांसदों को राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया। शीतकालीन सत्र चार दिसंबर को शुरू हुआ और 22 दिसंबर को समाप्त होने वाला था
