गुरु गोबिंद सिंह के चार साहेबजादों को दी श्रद्धांजलि
देहरादून। गुरु गोबिंद सिंह के चार पुत्रों बाबा अजित सिंह,बाबा फतेह सिंह,बाबा जोरावर सिंह और बाबा जुझार सिंह के बलिदान दिवस पर प्रेमनगर स्थित दमदमा गुरुद्वारे में आयोजित गुरुग्रंथ साहिब के अखंड पाठ का समापन हुआ। इस दौरान मौजूद लोगों ने गुरु गोबिंद सिंह के चार साहेबजादों को श्रद्धांजलि दी।
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सिख पंथ के दसवें गुरु गुरुगोबिंद सिंह व उनके पूरे परिवार ने देश और कौम के लिए जो कुर्बानियां दी। उनकी मिसाल दुनिया के किसी इतिहास में नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के पिता गुरु तेग बहादुर ने देश और कौम और धर्म के लिए अपने शीश की बली दे दी। उन्होंने कहा कि चार- चार पुत्रों का बलिदान होने पर भी गुरु गोबिंद सिंह के माथे पर कोई बल नहीं पड़ा। बल्कि उन्होंने कहा कि इन पुत्रन के शीश पर बार दिए सुत चार, चार मुये तो क्या हुआ जीवत कई हजार। धस्माना ने कहा कि इसीलिए गुरुगोबिंद सिंह को सर्वस्व बलिदानी कहते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुगोबिंद सिंह के चार पुत्र क्रमशः 7 ,9, 11 और 15 साल की उम्र के थे। फिर भी वह औरंगजेब के जुल्म और प्रताड़ना के आगे नहीं झुके व अपना जीवन बलिदान दे दिया। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रेमनगर के प्रधान सरदार भगत सिंह, सरदार हरपाल सिंह पाली, मोहित ग्रोवर आदि मौजूद थे।
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि सिख पंथ के दसवें गुरु गुरुगोबिंद सिंह व उनके पूरे परिवार ने देश और कौम के लिए जो कुर्बानियां दी। उनकी मिसाल दुनिया के किसी इतिहास में नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह के पिता गुरु तेग बहादुर ने देश और कौम और धर्म के लिए अपने शीश की बली दे दी। उन्होंने कहा कि चार- चार पुत्रों का बलिदान होने पर भी गुरु गोबिंद सिंह के माथे पर कोई बल नहीं पड़ा। बल्कि उन्होंने कहा कि इन पुत्रन के शीश पर बार दिए सुत चार, चार मुये तो क्या हुआ जीवत कई हजार। धस्माना ने कहा कि इसीलिए गुरुगोबिंद सिंह को सर्वस्व बलिदानी कहते हैं। उन्होंने कहा कि गुरुगोबिंद सिंह के चार पुत्र क्रमशः 7 ,9, 11 और 15 साल की उम्र के थे। फिर भी वह औरंगजेब के जुल्म और प्रताड़ना के आगे नहीं झुके व अपना जीवन बलिदान दे दिया। इस अवसर पर गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रेमनगर के प्रधान सरदार भगत सिंह, सरदार हरपाल सिंह पाली, मोहित ग्रोवर आदि मौजूद थे।

