कांग्रेस ने पूछा, घाटी में शांति कायम करने के लिए मोदी सरकार क्या कर रही
नई दिल्ली
कांग्रेस ने कश्मीर घाटी में लक्षित हत्या की घटनाओं को लेकर शुक्रवार को केंद्र पर तीखा प्रहार कर पूछा कि अब सरकार को ‘दुष्प्रचार’ की बजाय यह बताना चाहिए कि वह सामान्य स्थिति बहाल करने तथा हत्याओं को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है? पार्टी के नेता और सांसद विवेक तन्खा ने कहा कि शांति बहाली के लिए सरकार को संबंधित पक्षों से बात कर जम्मू-कश्मीर की जनता और राजनीतिक दलों को विश्वास में लेना चाहिए।उन्होंने कहा, ‘‘मैं एक कश्मीरी पंडित हूं। मुझे इस बात का दुख है कि कश्मीर के मुद्दे का समाधान करने में कुशल राजनीतिक नेतृत्व की कमी दिखती है। यह जटिल मुद्दा है। अगर आपका संवेदनशील चेहरा होता है, समावेशी चेहरा होता है, तब चीजें नियंत्रण में आ जाती है।’’
तन्खा ने कहा, मैंने पहले भी कहा था और आज भी कह रहा हूं कि कश्मीर का मुद्दा अनुच्छेद 370 या किसी कानून से बड़ा है.. अगर आप को कश्मीर के मुद्दे का निदान करना है और अगर आप शांति चाहते हैं, तब आपको संबंधित पक्षों से बात करनी होगी। संबंधित पक्षों से बात किए बिना वहां शांति नहीं आ सकती। सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रयास होता नहीं दिख रहा।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार सिर्फ दुष्प्रचार कर रही है। कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘जम्मू-कश्मीर में छह-सात साल से राज्यपाल शासन है। आठ साल से केंद्र में भाजपा की सरकार है। अब आप (सरकार) यह आरोप नहीं मढ़ सकते कि 60 साल में क्या हुआ? आपसे देश पूछना चाहता है कि आपने कश्मीर के लिए क्या ठोस कदम उठाए, कश्मीर को लेकर आपका श्वेत पत्र कहां है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री जी हर छोटी बात पर ट्वीट करते हैं। काश, प्रधानमंत्री कश्मीर को लेकर भी ट्वीट करते।’’
तन्खा ने कहा, हम केंद्र से अपील करते हैं कि आप सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए जरूरी कदम उठाइए और इस बारे में देश को बताइए। दूसरे दलों को विश्वास में लीजिए। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना दिखाइए।’’ उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए तथा दुष्प्रचार करने की बजाय ठोस कदम उठाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘हत्याओं को रोकने के लिए जरूरी कदम 24 घंटे में उठाए जाने चाहिए। यह पूछने पर कि वह जिन संबंधित पक्षों से बातचीत करने की बात कर रहे हैं, क्या उनमें अलगाववादी भी शामिल हैं, तब तन्खा ने कहा, ‘‘यह यहां चर्चा का विषय नहीं है। यह सरकार तय करेगी कि किससे बात करनी है।’’

