छह माह से स्थाई एसडीएम नहीं होने से राजस्व कोर्ट में जमीन के हजारों मामले लंबित हुए
छतरपुर
बीते छह माह पहले लंबे अरसे तक छतरपुर में पदस्थ रहे कलेक्टर शीलेंद्र सिंह को जिले के भाजपा विधायक राजेश प्रजापति से विवाद होने के कारण हटाया गया था और उनके स्थान पर जबलपुर नगर निगम में कमिश्नर संदीप जीआर को जिले का प्रभार सौंपा गया था। छह माह से भी अधिक समय बीत जाने के बाद भी जनता को तहसीलों में होने वाली समस्याओं से निजात नहीं मिल पा रही है। लोगों को आशा थी कि युवा कलेक्टर राजस्व संबंधी समस्याओं से निजात दिलवाएंगे लेकिन दूर के ढोल सुहावने साबित हुए। दशकों से जिले की तहसीलों में भर्राशाही का आलम है। जिस ढर्रे पर तहसीलों में काम किया जा रहा था उसी एर्रे पर आज भी तहसीलें चलाई जा रही हैं। छतरपुर शहर में अनुविभागीय अधिकारी का पद छह माह से रिक्त है। अस्थाई तौर पर नोगांव में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी विनय द्विवेदी को चार्ज सौंपा गया है जो सप्ताह में मात्र दो दिन दफ्तर में बैठते हैं। इस कारण लोगों को भारी परेशानी हो रही है। आलम यह है कि राजस्व के हजारों मामले एसडीएम कोर्ट में लंबित हैं। बीते दिन ही वरिश्ठ अधिक्ता लक्ष्मीकांत चतुर्वेदी ने कलेक्टर को चि_ी खिलकर नाराजगी जाहिर की और स्थाई रूप से अनुविभागीय अधिकारी को पदस्थ करने का आग्रह किया। चि_ी में उल्लेख है कि छतरपुर तहसील में पदस्थ अफसरों के द्वारा नामांतरण के मामलों में सन 1943-44 में दर्ज न होने का हवाला देकर प्रकरण को खारिज कर दिया जाता है। जिसकी अपील अनुविभागीय अधिकारी को होती है, लेकिन उनके न बैठने से मामला लंबित ही रहता है। तहसील के समसत अधिवक्ताओं सहित भेजी गई चि_ी में उल्लेख किया गया है कि रजिस्टर्ड विक्रय के आधार पर पेश नामांतरण प्रकरण में तहसीलदार छतरपुर द्वारा चारवर्ष 1943-44 संवत 2013 लगायत 2017 की खसरा की नकल के आधार पर प्रकरणों का निराकरण किया जाता है जिससे आम जनता किसान परेशान हैं। उप पंजीयक कार्यालय वर्तमान में खसरा नकल के आधार पर विक्रय पत्र पंजीकृत किया जाता है तो फिर नामांतरण में 1939-40 बंदोबस्त की नकल क्यों मांगी जाती है? भू-राजसव संहिता 1959 में लागू फिर सन् 1943-44 की नकल क्यों? 1947 में भारत देश स्वतंत्र हुआ तथा 26 जनवरी 1950 को देश में अपना गणतंत्र लागू हुआ और 1956 में राज्यों के पुर्नगठन का सिलसिला चल रहा था जिसके तहत एक नवम्बर 1956 को मध्यप्रदेश का गठन किया गया तथा 1959 में मप्र भू-राजस्व संदिता लागू हुई। यह जानकारी साधारण समण् रखने वाला भी जानता है। लेकिन इसके बावजूद छतरपुर तहसील में पदस्थ अधिकारियों के द्वारा लिखित रूप से प्रकरणों में सन 1943-44 में भू-स्वामित्व की नकल मांगी जा रही है। नौगांव से छतरपुर एसडीएम का कार्य नहीं कर पा रहे विनय द्विवेदी? जिले में पदस्थ राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी ने ऑफ कैमरा ध्यान दिया है छतरपुर में और भी डिप्टी कलेक्टर हैं जिन्हें छतरपुर अनुविभागीय अधिकारी बनाया जा सकता है लेकिन विनय द्विवेदी को ही छतरपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, जबकि वे नौगांव में पदस्थ हैं ऐसे में नौगांव के हालत भी छतरपुर की तरह बने हुए हैं। एक अधिकारी दो-दो जगह का चार्ज संभालने में सक्षम नहीं होता। दो जगह का चार्ज होने से कहीं का भी कार्य ठीक तरह से नहीं हो पाता है।

