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नगालैंड के लिए भाजपा का संकल्प

 

ऽभाजपा ने नगालैंड मंे जारी किया चुनाव घोषणा पत्र
ऽकौशल विकास के अलावा बुनियादी ढांचे के साथ स्वास्थ्य सीखा और कृषि को बढ़ावा देने का वादा
पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील राज्य नगालैंड मंे आगामी 27 फरवरी को विधानसभा चुनाव होने हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) ने 15 फरवरी को चुनाव घोषणा पत्र जारी किया है। श्री नड्डा ने राज्य के शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे मंे विकास करने का वादा किया है। नगालैण्ड मंे भाजपा ने नार्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस के घटल दल नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। राज्य की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए भाजपा ने 20 उम्मीदवार उतारे हैं तो 40 सीटों पर एनडीपीपी चुनाव लड़ेगी। पूर्वोत्तर भारत के इन राज्यों मंे भाजपा कभी सत्ता से कोसों दूर थी लेकिन अब कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर भाजपा ने सत्ता में साझेदारी की है। इस बार के चुनाव मंे भी भाजपा अपना जनाधार बढ़ाते हुए सत्ता को बरकरार रखना चाहती है। इसलिए त्रिपुरा, मेघालय और नगालैण्ड के लिए खास रणनीति बनायी गयी है। कुछ अलगाववादी नेताओं ने स्वतंत्र नगालैण्ड की मांग कर रखी है। कई सालों से सरकार के साथ नगा नेताओं की बात चल रही है। विधानसभा चुनाव मंे भी यह मुद्दा बनेगा।
भारतीय जनता पार्टी ने पूर्वी नगालैंड के लिए एक विशेष पैकेज देने और राज्य में पार्टी के लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटने पर क्षेत्र के समग्र विकास के लिए एक विकास बोर्ड गठित करने का वादा किया है। बीजेपी और उसके सहयोगी दल एनडीपीपी 27 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में गठबंधन कर चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा जारी पार्टी के घोषणा पत्र में कौशल विकास के अलावा बुनियादी ढांचे, आर्थिक विकास और स्वास्थ्य सेवा और कृषि को बढ़ावा देने के लिए कई उपायों की भी घोषणा की गई है। घोषणा पत्र में कहा गया है, हम ट्रांस-नगालैंड राजमार्ग के निर्माण में तेजी लाने के लिए केंद्र सरकार के साथ काम करेंगे, ताकि विभिन्न जिलों में, खासकर पूर्वी नगालैंड से आसानी से पहुंचा जा सके। नगालैंड की 60 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव 27 फरवरी को होंगे और नतीजे दो मार्च को घोषित किए जाएंगे।
उत्तर-पूर्व भारत के 3 राज्यों मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में मैदान में उतरने से पहले बीजेपी ने अपनी खास रणनीति बना ली है। बीजेपी ने नगालैंड में नेशनल डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी के साथ गठबंधन पक्का कर लिया है। 60 सीटों की नगालैंड विधानसभा में बीजेपी 20 सीटों में अपने उम्मीदवार उतारेगी। वहीं, नगालैंड की बाकी 40 सीटों में एनडीपीपी जो नॉर्थईस्ट डेमोक्रेटिक एलायंस का घटक दल है, उसके उम्मीदवार टिकट पाएंगे। मेघालय और त्रिपुरा चुनाव के लिए भी बीजेपी का खास प्लान है। बता दें कि मेघालय में बीजेपी इस बार अकेले ही चुनाव लड़ेगी। यहां घटक दल के नेता और मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी पहले ही बिना गठबंधन चुनाव लड़ने के घोषणा कर चुकी है। हालांकि, 2018 में चुनाव के बाद मेघालय में 6 दलों का गठबंधन हुआ था, जिसकी मदद से 5 साल तक सरकार चली। इस गठबंधन सरकार में बीजेपी के 2 विधायक भी शामिल थे। पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी अपना कब्जा बनाए रखने और विपक्षियों को हराने के लिए मजबूत रणनीति पर काम कर रही है। विधानसभा चुनाव वाले तीनों राज्यों में गठबंधन को लेकर भी बात बन चुकी है या उसपर बातचीत हो रही है।
नगालैण्ड का मामला ज्यादा संवेदनशील है। अलगाववादी नगा समूहों के साथ पिछले कई वर्षों से जारी बातचीत का अभी तक कोई सफल नतीजा सामने नहीं आया है। इससे नगा समूहों के साथ ही वहां के राजनेताओं की अधीरता बढ़ रही है। नगालैंड के सीएम नेफ्यू रियो के नेतृत्व में नगा समूहों के एक प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी। प्रतिनिधिमंडल ने उनसे नगालैंड के राजनीतिक मुद्दों को जल्द सुलझाने की मांग की। सरकार ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में बातचीत चल रही है। निकट भविष्य में इसका सकारात्मक हल निश्चित रूप से निकलेगा।
नगा समूहों के साथ बातचीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मुद्दे पर बयान जारी कर मामले की जानकारी दी। गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भारत सरकार का हमेशा से यह प्रयास रहा है कि पूर्वोत्तर को शांतिपूर्ण और समृद्ध बनाया जाए। इसी उद्देश्य के साथ पूर्वोत्तर के विभिन्न अलगाववादी समूहों के साथ बातचीत की जा रही है। कई सालों से सरकार की नगा संगठनों के साथ बातचीत चल रही है। सरकार का प्रयास रहा है कि नागा वार्ता में शामिल कई जटिल मुद्दों को इस तरह से सुलझाया जाए कि वार्ता के समापन पर सभी को संतुष्टि हो। चूंकि बातचीत अभी भी जारी है, इसलिए वार्ता के दौरान विभिन्न मुद्दों के संभावित समाधान पर कोई रिपोर्ट केवल अटकलबाजी होगी। भारत सरकार की नगालैंड के सबसे बड़े विद्रोही संगठन एनएससीएन के नेताओं के साथ पिछले कई सालों से बातचीत चल रही है। खपलांग गुट इस बातचीत के खिलाफ है। सरकार और बातचीत में अधिकतर मुद्दों पर सहमति बन गई है। लेकिन अपना अपना अलग झंडा, संविधान और ग्रेटर नागालिम जैसे मुद्दों की वजह से कोई समझौता नहीं हो पा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक सरकार ने नगा समूहों को स्पष्ट कर रखा है कि यह मांग देश की अस्मिता के खिलाफ हैं, जिसे किसी भी सूरत में माना नहीं जा सकता है। वहीं नगा संगठन इन तीनों मुद्दों पर अड़े हुए हैं। सरकार लगातार नगा संगठनों को समझाने में लगी है कि राज्य के तौर पर उनके किसी भी अधिकार में कटौती नहीं होगी लेकिन उसे अलग झंडे और संविधान की इजाजत नहीं दी जा सकती। भाजपा सरकार ने 8 सितम्बर 2022 को संघर्ष विराम समझौता भी किया था जो कई बार बढ़ाया गया है।