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1930 का जंगल सत्याग्रह – मवेशियों को चराने का टैक्स वसूलते थे अंग्रेज

मंडला

अंग्रेजो के खिलाफ आदिवासियों एवं ग्रामीण अंचलों में बगावत की शुरुआत 1930 में हो गई थी। अंग्रेज ष्चारीष् नामक टैक्स जंगल में पशुओं को चराने के लिए वसूल करते थे। पशुओं को चराने के लिए टैक्स की रसीद जिन पशुपालकों के पास नहीं होती थी। उनके पशुओं को कांजी हाउस में ले जाकर बंद कर दिया जाता था। भारी जुर्माना लेकर ही पशुओं को छोड़ा जाता था। जिसके कारण गांव गांव में अंग्रेज सरकार के चारी कानून का विरोध होना शुरू हुआ। जो बाद में जंगल सत्याग्रह के रूप में बदल कर जगह-जगह आंदोलन बन गया। अंग्रेजो के खिलाफ बगावत में आदिवासियों और ग्रामीण जनों की सीधी भागीदारी 1930 से शुरू हुई। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में जंगल सत्याग्रह और नमक सत्याग्रह ने पूरे देश भर में स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा दे दी। जिसमें आम आदमी सक्रिय रुप से अंग्रेजो के खिलाफ खड़ा हो गया था।